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तिरहुत रेल का सफर:-

17 अप्रैल 1874 को समस्‍तीपुर से तिरहुत रेलवे की पहली ट्रेन दरभंगा पहुंची थी। वैसे तिरहुत रेलवे का सफर सोनपुर से शुरु हुआ था। भारत के रेल इतिहास में तिरहुत रेलवे दो कारणों से उल्‍लेखित किया गया है। पहला 1874 से 1934 के बीच भारत में सबसे ज्‍यादा रेल पटरी तिरहुत रेलवे ने ही बिछाई। दूसरा यात्री सुविधा को लेकर तिरहुत रेलवे ने कई प्रयोग किये, जिनमें सामान्‍य श्रेणी के डिब्‍बों में शौचालय की व्‍यवस्‍था भारत में सबसे पहले तिरहुत रेलवे ने ही यात्री को मुहैया करायी। तिरहुत रेलवे का विकास का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि 1934 के भूकंप में क्षतिग्रस्‍त पटरी आज तक यूं ही पडी हुई है और पूर्णिया प्रमंडल का दरभंगा प्रमंडल से जो रेल संपर्क 1880 के आसपास ही जुड गया था वो 1934 से आज तक नहीं जुड पाया है।

जहां तक इसके इतिहास और इसके बनाये आधारभूत संरचना को बचाने या संरक्षित करने का सवाल है तो यह काम अब तक सही तरीके से नहीं हो पाया है।

दरभंगा की नई पीढ़ी आज शहर में दो रेलवे स्टेशन देखती है, एक दरभंगा जंक्शन और दूसरा लहेरियासराय स्टेशन। दरभंगा में कभी हुआ करते थे तीन रेलवे स्टेशन…

– तीसरा रेलवे स्टेशन वर्तमान लनामिविवि स्थित नरगौना पैलेस के परिसर में हुआ करता था जिसे नरगौना टर्मिनल के नाम से जाना जाता था।
– जानकारों की मानें तो छत्र निवास परिसर जो बाद में नरगौना परिसर के नाम से जाना गया, देश का इकलौता महल था जिसके परिसर मे रेलवे स्टेशन हुआ करता था।

– उसके अवशेष आज भी नरगौना परिसर में अपने सुनहरे अतीत को याद करता मौजूद है।

– इस स्टेशन पर दरभंगा राज का पैलेस ऑन व्हील  दौड़ा करती थी।

– इस ट्रेन का उपयोग राज परिवार के लोगों, तिरहुत सरकार के अधिकारियों और अतिथियों को लाने- ले जाने में किया जाता था।

– पैलेस ऑन व्हील अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त था।

पटरियों की जगह अब पगडंडी

– जहां पर पटरियां बिछी हुई थीं, वहां आज पगडंडी नजर आती है।

– हालांकि प्लेटफार्म के कुछ अवशेष अभी भी बचे हुए हैं।

– आज ना तो उस पैलेस ऑन व्हील का कोई नामोनिशान बचा और ना ही परिसर में बिछी रेल पटरियों का।

– अगर कुछ बचा है तो नरगौना टर्मिनल स्टेशन के प्लेटफार्म का अवशेष।

– यह अवशेष इस बात की गवाही देता है कि शहर का अतीत काफी सुनहरा रहा।

प्रथम राष्ट्रपति ने किया था सफर

– देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरु, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन सहित राष्ट्रीय फलक के कई चर्चित हस्तियों ने इस पैलेस ऑन व्हील पर सफर किया था।

– 1976 में परिसर के अधिग्रहण के बाद पैलेस ऑन व्हील को अनुपयोगी और राजशाही का प्रतीक बताकर कबाड़ी के हाथों बेच दिया गया।

– लोगों की मानें तो उस पैलेस ऑन व्हील से लगभग 350 किलो चांदी निकला था जिसका आज तक कोई अता-पता नहीं है।

– वहीं बरौनी में रखे बड़ी रेल लाईन के पैलेस ऑन व्हील को 1975 में आग के हवाले कर दिया गया।

– जिस गेट से पैलेस ऑन व्हील नरगौना टर्मिनल पर प्रवेश करती थी उस गेट को तोड़कर आज वहां ईंट की पक्की दीवार खड़ी कर दी गई है।

तिरहुत में बिछी 70 फीसदी पटरी तिरहुत रेलवे के दौरान ही बिछायी गयी थी। आजाद भारत में महज 30 फीसदी का विस्‍तार हुआ है।

कब और कहां चली तिरहुत में रेल…

BNW(Tir): Tirhut main line (Metre gauge: 168 miles)
Sonepur to Hajipur ‘South Junc’ (Anwarpur) (3 miles) opened (1) 25 August 1887

Hajipur ‘South’ to ‘North’ Junctions (1 mile) opened 1 October 1884

Hajipur ‘North’ to Bachhwara (44 miles) opened 1 April 1900

Bachhwara to Barauni Junction (10 miles) opened 1 May 1883

Barauni Junction to Thana Bihpur (66 miles) opened 1 March 1900

Thana Bihpur to Katarea (17 miles) opened 1 February 1901

Katarea to Kursela (4 miles) opened 26 June 1902

Kursela to Katihar West (22 miles) opened 7 March 1901

BNW(Tir)1: Patna branch (Metre gauge: 1 mile)
Hajipur ‘South Junction’ to Hajipur Ghat (1 mile) opened 1 October 1884
> Hajipur Ghat to Patna (by ferry) <
closed

BNW(Tir)2: Hajipur-Muzaffarpur line (Metre gauge: 32 miles)
Hajipur to Muzaffarpur (32 miles) opened 26 October 1884

BNW(Tir)3: Bachhwara-Bagaha line (Metre gauge: 177 miles)
Bachhwara to Dalsing Sarai (6 miles) opened 1 May 1883

Dalsing Sarai to Samastipur
opened 1 November 1875

Samastipur to Muzaffarpur (32 miles) opened 24 February 1877

Muzaffarpur to Motihari (49 miles) opened 1 February 1883

Motihari to Bettia (26 miles) opened 20 December 1883

Bettia to Narkatiganj (24 miles) opened 17 January 1906

Narkatiganj to Bagaha (26 miles) opened 1 May 1907

Bagaha to Gandak Bridge (½ mile) opened 9 August 1912

# Bachhwara to Bagaha? (Metre to Broad gauge) converted 1975?
~ old Ganges branch (Metre gauge: 10 miles)
Dalsingsarai to Chumpta Ghat (10 miles)
6
opened 1 November 1875
closed 1886/87?

BNW(Tir)3.1: Samastipur-Khagaria line (Metre gauge: 53 miles)

Samastipur to Rusera Ghat (18 miles) opened 21 December 1912

Rusera Ghat to Hasanpur Road (11 miles) opened 7 May 1915

Hasanpur Road to Khagaria (25 miles) opened 7 November 1915
# Khagaria to Hasanpur (Metre to Broad gauge) converted Autumn 2006

# Hasanpur Road to Ruseraghat (Metre to Broad gauge) converted Spring 2007

BNW(Tir)3.2: Samastipur-Narkatiaganj loop (Metre gauge: 142 miles)

Samastipur to Darbhanga (23 miles)
7
opened 1 November 1875

Darbhanga to Sitamarhi (42 miles) opened (1 July) 1 November 1890

Sitamarhi to Riga (6 miles) opened (1 Jan) 1 May? 1891

Riga to Dhang (9 miles) opened (1 July) 1 November 1891

Dhang to Bairagnia (2 miles) opened (1) 15 March 1892

Bairagnia to Narkatiaganj (57 miles) opened 20 December 1907
5
Opened for famine relief traffic on 17th April 1874.
6
Opened for famine relief traffic on 17th April 1874. Extended on temporary tracks to a new station seven miles
upstream on 23rd December 1878.
7
The section from Samastipur to Darbhanga was opened for famine relief traffic on 17th April 1874.

श्री हेतुकर झा, प्रबंधन न्‍यासी, महाराजा कामेश्‍वर सिंह फाउंडेश को साभार , उनकी वजह से बहुत कुछ आज हम और आप देख और पढ रहे हैं। ..

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