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चौर:-

चौर आनि एहन निम्न तस्तरी नुमा भूमि जाहि
पर सालो भरि आ अधिकांश समय जल भरल रहैत छैक)

चौर – मिथिला मे प्रकृति किछु एहन व्यबस्था कयने अछि जे नदी नाला सँ सटल चौर होईत छैक; चौर आनि एहन निम्न तस्तरी नुमा भूमि जाहि पर सालो भरि आ अधिकांश समय जल भरल रहैत छैक . चौर सँ सटल निम्ने मुदा चौर सँ अधिक उंचगर भूमि क श्रृंखला रहैछ जाहि मे मात्र बरसात मे जल जमा रहि पबैत अछि जखन कि चौर मे ओकर हिस्सा क न्यूनतम दसवां भाग मे चैत-बैसाख मे सेहो जल रहैत अछि. निम्न भूमि सँ लागल उच्च भूमि क श्रृंखला होईछ. ऊपर सँ बहि क आबय वला जल मे घुलल प्रदूषक पदार्थ चौर मे जमा होईत छैक वा स्वच्छ जल नदी मे चलि जाईत अछि. एहि प्रकारे चौर न सिर्फ अतिरेक जल क अपना मे जमा राखि बाढ क INTENSITY घट्बैत अछि बल्कि गर्मी मे नदी क जल आपूरित क ओकर रक्षा करैत अछि. तैं मिथिला मे चौर क नदी क भाई कहल गेल अछि. मिथिलाक जिला मे जे राजस्व अभिलेख अछि, ओहि मे चौर क धनहा चौर अभिलिखित छैक. कारण चौर मे मुख्यतः धान क संग अथवा अलग अलग मुंग, मकई, बूट, खेसारी, सामा/ कोदो/मरुआ/जनेर सन मोट अनाज, पशु चारा, अनेको प्रकार क उपयोगी फ़्लोरा/फौना क उत्पादन होईत छल. कांड,मूल. बिसंर, सौरुकी,चिचोर, घोघा,सितुआ, कांकोर, कछुआ, माछ आदि खाद्य पदार्थ चौर मे अनेरे होईत छल एवं ई सभ common property क रूप मे गरीब क निशुल्क उपलब्ध छल. योजना पत्रिका १९९९ मे प्रतिवेदित अछि जे प्रति हेक्टेयर चौर मे २५० किलो माछ क उत्पादन होईत अछि. नदी नाला चौर वा कृषि भूमि क संग एक इकोसिस्टम क निर्माण करैत अछि. एहि इकोसिस्टम मे फ़्लोरा एवं फौना क बहुत अधिक किस्म विकसित भेल अछि जकरा चलते मिथिला मे इकोलॉजिकल स्टेबिलिटी बहुत अधिक आबि गेलैक. ई प्रकृति क नियम छैक जे जतेक अधिक बायोलॉजिकल डाइवर्सिटी, ओतेक अधिक ओतेक अधिक इकोलॉजिकल स्टेबिलिटी एवं ओतबे अधिक इकनोमिक फर्टिलिटी/प्रोडक्टिविटी.

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